स्तम्भन मंत्र तंत्र

Stambhan Mantra Tantra :

स्तम्भन मंत्र : ॐ बं बं बं हं ह्रीं घ्रां ठ: ठ: ।
ग्यारह हजार बार जपें ।मंगलबार को निगोही का बीज लेकर इकतीस बार मंत्र पढ़े जिस पर फेंके बही स्तम्भित हो जाए ।

@ मंत्र : ॐ नम: भगबते रुद्राय जलं स्तम्भय स्तम्भय ठ: ठ: स्वाहा ।
कमल को महीन पीसकर स्तम्भन मंत्र तंत्र (Stambhan Mantra Tantra) 11 बार पढ़कर जल में छोड़ें तो जल स्तम्भित हो जाता है ।

@ लिसौड़े का चूर्ण बनाकर निम्नलिखित मंत्र से अभिमंत्रित कर जल में छोड़ें तो जल स्तम्भित हो जाता है ।

मंत्र : ॐ मेधा स्तम्भन कुरु कुरु स्वाहा ।
नई ईट पर चिता की राख से चारों तरफ चार रेखा खींच एक ईट उस राख पर रख के 108 बार मंत्र पढ़कर खिलाबें तो बुद्धि नष्ट हो जाती है ।

@ मंत्र : ॐ नमो दिगम्बराय अमुकस्य आसन स्तम्भनं कुरू कुरू स्वाहा ।
श्मशान में जाकर एक हजार आठ बार मंत्र पढ़ें तो आसन स्तम्भित हो जाता है ।

@ जहाँ पर नदी और समुद्र का मिलन हुआ हो बहाँ जाकर अपने हाथों से किनारे की मिट्टी लाबें और कुत्ते की दुम के बाल लाकर दोनों को मिलाकर गोली बनाकर तेल डाल दें और जिसे दिखाबें तो बैठा मनुष्य उठ नहीं सकता है ।

@ रजस्वला स्त्री का रक्तबेष्टित बस्त्र लाकर गोरेचन और मजीठ से जिसका नाम लिखकर घर में डाल दें तो बह स्तम्भित है ।

@ महुआ और ककड़ी की जड़ पीसकर सूंघने से नींद स्तम्भित हो जाती है ।

@ सोमबार को अपामार्ग की जड़ को कमर में बांधे तो बीर्य स्तम्भित हो ।

@ घुग्घू की जीभ एक रती गोरोचन के साथ पीस तांबे की ताबीज में रखें फिर बाँह में बाँध कर सम्भोग करे तो बीर्य स्तम्भित हो ।

@ स्तम्भन मंत्र तंत्र (Stambhan Mantra Tantra) : “धार धार खंड धार बांधू सात बार फिर बाँध त्रिबार चले धार न लागो घाब सीर राखे श्री हनुमान श्री गोरखनाथ लोहे का कडा मुंकाबाण लगो न पैनी फार कुंठित होय तलबार ।”

चौराहे की धूल 21 बार मंत्र पढ़कर धार पर मारे तो धार स्तम्भित हो जाती है ।

@ सुदर्शन की जड़ बाहु में बाँधने से चोट नहीं लगती है ।

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चेताबनी : भारतीय संस्कृति में स्तम्भन मंत्र तंत्र साधना (Stambhan Mantra Tantra Sadhna) का बिशेष महत्व है । परन्तु यदि किसी साधक यंहा दी गयी स्तम्भन मंत्र तंत्र साधना (Stambhan Mantra Tantra Sadhna) के प्रयोग में बिधिबत, बस्तुगत अशुद्धता अथबा त्रुटी के कारण किसी भी प्रकार की कलेश्जनक हानि होती है, अथबा कोई अनिष्ट होता है, तो इसका उत्तरदायित्व स्वयं उसी का होगा । उसके लिए उत्तरदायी हम नहीं होंगे । अत: कोई भी प्रयोग योग्य ब्यक्ति या जानकरी बिद्वान से ही करे। यंहा हम सिर्फ जानकारी के लिए दिया हुं ।

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Acharya Pradip Kumar is the founder of Mystic Shiva Astrology and a practitioner of Vedic astrology with a solution-oriented approach. His work focuses on understanding birth charts as tools for clarity, awareness, and practical decision-making rather than fear-based predictions. Rooted in classical astrological principles and real-life experience, he emphasizes responsible guidance, timing, and conscious remedies aligned with an individual’s life path.

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