मारण मंत्र प्रयोग विधि

Maran Mantra Prayog Vidhi :

किसी भी मनुष्य (प्राणी) के प्रति सामान्य रूप से मारण का प्रयोग करना सर्बथा अनुचित तथा निदनीय माना जाता है, परन्तु षट- कर्मो में इसकी गणना होने के कारण तथा कभी – कभी पूर्णतया बिबश होकर मारणकर्म करना अनिबार्य हो जाता है, इसलिए इसकी प्रयोग बिधि दे रहे हैं ।

निर्दोष होते हुए भी, किसी के द्वारा अकारण स्वयं के प्राणों पर संकट उपस्थित हो गया हो, तो इसका प्रयोग कर सकते हैं, अन्यथा नहीं ।

यदि स्वयं के दोष के कारण किसी के द्वारा आपके प्राणों पर संकट आ गया हो तो संरक्षण का उपाय करें, किसी के मारण के लिए नहीं ।

यदि कर्ता नियमों का पालन नहीं करता तथा किसी के प्रति अनुचित रूप से मारण का प्रयोग करता है, तो स्वयं की मृत्यु अथबा मृत्यु –तुल्य कष्ट प्राप्ति की सम्भाबना हो सकती है ।

Maran Mantra :

मंत्र – “क्रीं इत्थं यदा यदा बाधा दानबोत्था भाबिष्यति ।
तदा तदाबतीर्याहं करिष्याम्यरि संक्षयम् क्रीं ।।

Maran Mantra Prayog Vidhi :

श्मशान अथबा जनशून्य शिबालय में बैठकर पहले तत्वशोधन रूप तीन बार आचमन करें । सम्मुख सरसों के तेल का दीपक जलाकर रखें । तदुपरान्त स्फटिक की माला से उपर्युक्त मंत्र (Maran Mantra) का ग्यारह माला जप करें । इस क्रिया को सताईस (27) दिनों तक करें । मंत्र जप करते समय शत्रु को चिता पर जलाते हुए देखने का ध्यान करें । माँ की कृपा से निशिचित ही शत्रु यमालय को गमन करेगा ।

पुन: निबेदन है की इस मंत्र का कभी भी अनुचित प्रयोग न करें, अन्यथा स्वयं कर्ता ही संकट में पड जायगा अथबा उसकी मृत्यु हो जायेगी ।

जब कर्ता स्वयं निर्दोष हो तथा बहुत ही बिषम परिस्थिति में पड़ गया हो, उसी समय माँ से प्रार्थना करके प्रयोग करें ।

धन के लोभ से अनुष्ठान (किसी अन्य के लिए) कभी भी न करे अन्यथा माँ के कोप से सम्पूर्ण परिबार का बिनाश हो सकता है ।

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चेताबनी : भारतीय संस्कृति में मंत्र तंत्र यन्त्र साधना का बिशेष महत्व है ।परन्तु यदि किसी साधक यंहा दी गयी साधना (Maran Mantra) के प्रयोग में बिधिबत, बस्तुगत अशुद्धता अथबा त्रुटी के कारण किसी भी प्रकार की कलेश्जनक हानि होती है, अथबा कोई अनिष्ट होता है, तो इसका उत्तरदायित्व स्वयं उसी का होगा ।उसके लिए उत्तरदायी हम नहीं होंगे ।अत: कोई भी प्रयोग योग्य ब्यक्ति या जानकरी बिद्वान से ही करे। यंहा सिर्फ जानकारी के लिए दिया गया है । हर समस्या का समाधान केलिए आप हमें इस नो. पर सम्पर्क कर सकते हैं : 9438741641 (call/ whatsapp)

Acharya Pradip Kumar is the founder of Mystic Shiva Astrology and a practitioner of Vedic astrology with a solution-oriented approach. His work focuses on understanding birth charts as tools for clarity, awareness, and practical decision-making rather than fear-based predictions. Rooted in classical astrological principles and real-life experience, he emphasizes responsible guidance, timing, and conscious remedies aligned with an individual’s life path.

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