बिष्णु सुदर्शन यंत्र का कैसे उपयोग करें ?

Vishnu Sudarshan Yantra की रचना कोणसी शुभ दिन, पर्ब या शुभ मुहूर्त में अष्टगंध अथबा यक्षकर्दम की स्याही से अनार की लेखनी द्वारा भोजपत्र पर बनाये । बिधिबत पूजा करके ताबे या चाँदी के कबच में भरकर गले में या बाज़ू पर धारण करें । बिजय ब कार्यसिद्धि होगी । खोई हुई बस्तु प्राप्त होगी । कार्य करने में आने बाली बिघ्न – बाधाए दूर हो जाएगी ।

Vishnu Sudarshan Yantra likhne me sabdhaniyan :

यंत्र लेखन करते समय कलम का अथबा रुक जाना अपशकुन होता है, अत: पूरी साबधानी रखनी चाहिये ।

भोजपत्र, कागज, बृक्ष के पते , धातु से बने पतरे, स्फटिक तथा शालीग्राम शिला एबं मणि आदि सभी बस्तुए स्वच्छ हो, तथा किसी भी रूप में खंडित न हों, इसका बिशेष ध्यान रखें, क्यूंकि शुद्धता और पबित्रता सिद्धि का पहला सोपान है ।

यंत्र यदि किसी अन्य कारीगर से खुद्बाना हो तो आधार बस्तु पर पहले शुभ मुहूर्त में निर्दिष्ट सूत्रो से रेखांकन कर ले । बाद में, यथा समय कारीगर के औजारों को स्वच्छ जल से धोकर गन्धाक्षत दें । कारीगर के मस्तक पर तिलक करके, उसे कुच्छ दक्षिणा एबं खाद्य बस्तु प्रसाद स्वरुप दे दें, फिर vishnu sudarshan yantra उत्कीर्ण करबाए ।

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