कुण्डली में गुरु चांडाल योग क्या है ?

कुण्डली में गुरू चाण्डाल योग का होना अशुभ माना जाता है । इस योग के कारण जीवन में अनेक प्रकार की समस्यायें आती रहती है । पहचान के लक्षण-जिस जातक की कुंडली में गुरु चांडाल योग यानि कि गुरु- राहु की युति हो वह व्यक्ति क्रूर, धूर्त, मक्कार, दरिद्र और कुचेष्टाओं वाला होता है । ऐसा व्यक्ति षडयंत्र करने वाला, ईष्र्या-द्वेष, छल-कपट आदि दुर्भावना रखने वाला एवं कामुक प्रवत्ति का होता है, गुरु चांडाल योग धारण करने वाले जातक और कोई न कोई शारीरिक मानसिक विकृति होती है ।

जन्मपत्री के किस भाव में गुरू चाण्डाल योग के बनने से क्या-क्या प्रभाव पड़ते है :

1-यदि लग्न में गुरु चांडाल योग बन रहा है तो व्यक्ति का नैतिक चरित्र संदिग्ध रहेगा। धन के मामलें में भाग्यशाली रहेगा। धर्म को ज्यादा महत्व न देने वाला ऐसा जातक आत्म केन्द्रित नहीं होता है।
2-यदि द्वितीय भाव में गुरु चांडाल योग बन रहा है और गुरू बलवान है तो व्यक्ति धनवान होगा। यदि गुरू कमजोर है तो जातक धूम्रपान व मदिरापान में ज्यादा आशक्त होगा। धन हानि होगी और परिवार में मानसिक तनाव रहेंगे।
3-तृतीय भाव में गुरू व राहु के स्थित होने से ऐसा जातक साहसी व पराक्रमी होती है। गुरू के बलवान होने पर जातक लेखन कार्य में प्रसिद्ध पाता है और राहु के बलवान होने पर व्यक्ति गलत कार्यो में कुख्यात हो जाता है।
4-चतुर्थ घर में गुरु चांडाल योग बनने से व्यक्ति बुद्धिमान व समझदार होता है। किन्तु यदि गुरू बलहीन हो तो परिवार साथ नहीं देता और माता को कष्ट होता है।
5-यदि पंचम भाव में गुरु चांडाल योग बन रहा है और बृहस्पति नीच का है तो सन्तान को कष्ट होगा या सन्तान गलत राह पकड़ लेगा। शिक्षा में रूकावटें आयेंगी। राहु के ताकतवर होने से व्यक्ति मन असंतुलित रहेगा।
6-षष्ठम भाव में बनने वाले गुरु चांडाल योग में यदि गुरू बलवान है तो स्वास्थ्य अच्छा रहेगा और राहु के बलवान होने से शारीरिक दिक्कतें खासकर कमर से सम्बन्धित दिक्कतें रहेंगी एंव शत्रुओं से व्यक्ति पीडि़त रह सकता है।
7-सप्तम भाव में बनने वाले गुरु चांडाल योग में यदि गुरू पाप ग्रहों से पीडि़त है तो वैवाहिक जीवन कष्टकर साबित होगा। राहु के बलवान होने से जीवन साथी दुष्ट स्वभाव का होता है।
8-यदि अष्टम भाव में गुरु चांडाल योग बन रहा है और गुरू दुर्बल है तो आकस्मिक दुर्घटनायें, चोट, आपरेशन व विषपान आदि की आशंका रहती है। ससुराल पक्ष से तनाव भी बना रहता है। इस योग के कारण अचानक समस्यायें उत्पन्न होती है।
9-नवम भाव में बनने वाले गुरु चांडाल योग में गुरू के क्षीण होने से धार्मिक कार्यो में कम रूचि होती है एंव पिता से वैचारिक सम्बन्ध अच्छे नहीं रहते है। पिता के लिए भी यह योग कष्टकारी साबित होता है।
10-दशम भाव में बनने वाले गुरु चांडाल योग में व्यक्ति में नैतिक साहस की कमी होती, पद, प्रतिष्ठा पाने में बाधायें आती है। व्यवसाय व करियर में समस्यायें आती है। यदि गुरू बलवान है तो आने वाली बाधायें कम हो जाती है।
11-एकादश भाव में बनने वाले गुरु चांडाल योग में राहु के बलवान होने से धन गलत तरीके से भी आता है। दुष्ट मित्रों की संगति में पड़कर व्यक्ति गलत रास्ते पर भी चल पड़ता है। यदि गुरू बलवान है तो राहु के अशुभ प्रभावों को कुछ कम कर देगा।
12-द्वादश भाव में बन रहेे गुरु चांडाल योग में आध्यात्मिक आकांक्षाओं की प्राप्ति भी गलत मार्ग से होती है। राहु के बलवान होने से शयन सुख में कमी रहती है। आमदनी अठन्नी खर्चा रूपया रहता है। गुरू यदि बलवान है तो चाण्डाल योग का दुष्प्रभाव कम रहता है।

Guru Chandala Yoga  निवारण के उपाय-

गुरु चांडाल दोष की समय रहते अवश्य शांति करवा लेनी चाहिये। राहु या षष्ठेश की दशा हो तुरन्त इस दोष का उपाय करवाना चाहिये। गुरु चांडाल का प्रभाव व्यक्ति के निर्णयों के द्वारा होने वाली हानि को दर्शाता है अर्थात ऐसा इंसान अपने मन का गुलाम होकर गलत मार्गो को चुनता हैं।
उपाय :
1- माता पिता तथा गुरुजनों का आदर सत्कार करना। गलत संगती से दूर रहना, मांस मदिरा का सेवन न करना तथा गले में रुद्राक्ष व पीला पुखराज पहनना इस दोष के दुष्परिणामों से दूर रखता है।
2- भगवान सूर्य का पूजन करने से व्यक्ति का आत्मबल मजबूत होता है। सूर्य अदित्य हृदय स्तोत्र के पाठ द्वारा सूर्य पूजन करना चाहिये।
3- माथे पर पीले चंदन का टीका लगाये। गले में हल्दी की माला धारण करें।
4- राहु के उपाय के लिये पक्षियों को दाना दें। गैस सिलेंडर या कम्बल दान करें। शिव की उपासना करना लाभदायक होता है।
5- गुरु व राहु का विधी विधान पूर्वक पूजन करना चाहिये। मन्त्रों का जाप हवन यज्ञ, ब्राह्मणों को दान आदि कर्म करने चाहिये।
6- गुरु चांडाल दोष के लिये विष्णु सहस्त्रनाम स्त्रोत का नित्य पाठ करना अत्यधिक लाभदायक होता है।
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ज्योतिषाचार्य प्रदीप कुमार : +91-9438741641 (call/ whatsapp)

Acharya Pradip Kumar is the founder of Mystic Shiva Astrology and a practitioner of Vedic astrology with a solution-oriented approach. His work focuses on understanding birth charts as tools for clarity, awareness, and practical decision-making rather than fear-based predictions. Rooted in classical astrological principles and real-life experience, he emphasizes responsible guidance, timing, and conscious remedies aligned with an individual’s life path.

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